Friday, 6 December 2019

पाठ 11 दूध का दूध , पानी का पानी

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पाठ 11 दूध का दूध, पानी का पानी




एक राजा थाl वह अपने न्याय के लिए बहुत प्रसिद्ध थाl 1 दिन पड़ोस के एक राजा ने उसकी परीक्षा लेनी चाहीl यह सोचकर उसने अपना रूप बदला और घोड़े पर बैठकर शहर को चलाl वह सड़क पर जा रहा थाl रास्ते में उसे एक ठग मिला जिसने घुड़सवार राजा से विनती की कि वह उसे घोड़े पर बिठाकर बाजार तक ले चलेl राजा ने उसकी विनती मान ली तथा उसे घोड़े पर बिठा लियाl रास्ते में जब राजा पानी पीने के लिए घोड़े  से उतरा तो वह  थक घोड़ा लेकर भागने लगाlराजा ने शोर मचा दियाl लोगों ने घोड़े को रोक लियाl अग्नि झगड़ा कर दिया वह कहता था कि घोड़ा मेरा है राजा कहता था कि घोड़ा मेरा हैl

दोनों को  न्याय  के लिए राज -दरबार में ले जाया गयाl जहां 2 मुकदमें और चले रहे थे, जिन्हें राजा सुन रहा थाl एक तो लेखक तथा किसान के बीच में  नौकर के बारे में थाl नौकर गूंगा तथा  बहरा थाl किसान  कहता था कि नौकर हैराजा ने नौकर अपने पास रख लिया और उन्हें अगले दिन आने को कहाl

दूसरा झगड़ा था एक तेल वाले तथा एक कसाई के बीचl तेली कहता था के पैसे मेरे हैl राजा ने पैसे अपने पास रखें और दोनों से कहा के अगले दिन आनाl

अब तक और घुड़सवार राजा की बारी थीl उनका झगड़ा सुनकर राजा ने उनसे भी यही कहा कि घोड़ा जहां छोड़ जाओ और अगले दिन आनाl

अगले दिन में जब दरबार लगा तो राजा ने पहले मुकदमे का फैसला सुनाया और अपने सिपाही से कहा कि यह  नौकर लेखक का है, उसे सौंप दोl किसान को 50 चाबुक लगाने का दंड दिया गयाl

दूसरा मुकदमे में राजा ने आज्ञा दी के यह पैसे कसाई को दे दो और तेली को चाबुक लगाओl

अब बारी थी घुड़सवारी राजा तथा ठग के फैसले कीl राजा ने घोड़े को पहले ही अस्तबल में बांध दिया थाl उसने पहले घुड़सवार राजा को बुलाया और उसे अस्तबल में ले जाकर कहा के अपने घोड़े को पहचानोl राजा ने  तुरंत अपना घोड़ा पहचान लिया तथा उसकी पीठ  पर हाथ फेराl घोड़े ने भी अपने मालिक को पहचाना तथा वह हिनाहिनायाl

फिर राजा ठग को भी अस्तबल में  लाया और कहा कि अपना घोड़ा पहचानोl ठग ने घोड़ा तो पहचान लिया, परंतु घोड़े ने ठग को नहीं पहचानाl राजा ने अपना फैसला ठग के विरुद्ध सुनाया और उसे दंड दियाl पड़ोसी राजा अपना घोड़ा पाकर प्रसन्न हो गयाl अब उसने अपना नकली भेष उतार दियाlवह राजा की बुद्धिमानी पर बहुत खुशी हुआl राजा ने पड़ोसी राजा का आदर सत्कार कियाl

जब दरबार समाप्त हुआ तो पड़ोसी राजा ने पूछा, अपने किस प्रकार फैसले सुनाए? तब राजा ने कहा कि नौकर से मैंने पहले किसान के काम करवाए जिन्हें वह कर सका, फिर मैंने लेखक के काम करवाए, जैसे स्याही की दवात मांगी तो उसने बड़ी फुर्ती के साथ स्याही की दवात लाकर दीl इससे मैंने अपना फैसला सुनायाl तेली और कसाई के झगड़े को निपटाने के लिए मैंने पैसों को पानी से भरी बाल्टी में डाला तो देखा कि तेल के कन पानी पर नहीं तैर रहेlअत: पैसे तेल वाले की मुट्ठी के नहीं हैl

पड़ोसी राजा यह बातें सुनकर बहुत प्रसन्न हुआl उसने भी बुद्धि से न्याय करने का संकल्प कर लिया



3.  नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य मे  दे:-


( ) राजा की परीक्षा किसने लेनी  चाही ?
1.  राजा की परीक्षा पड़ोस के राजा ने लेनी चाहिए


() राजा को रास्ते में कौन मिला ?
2.  राजा को रास्ते में ठग मिला

() घोड़े का असली मालिक कौन था?
3.  घोड़े का असली मालिक पड़ोसी राजा था

) किसान को कितने चाबुक लगाने का दंड दिया गया?
4.  किसान को 50 चाबुक लगाने का दंड दिया गया

(ड़) इस कहानी में कौन सा पत्र  गूंगा  और बहरा  था?
5.  इस कहानी में नौकर  पात्र गूंगा और बहरा था

( ) 'सच्चा न्याय 'के लिए हिंदी में किस मुहावरे का प्रयोग होता है?
6.  'सच्चा न्याय' के लिए हिंदी में दूध का दूध, पानी का पानी मुहावरे का प्रयोग होता है

( ) पड़ोसी राजा ने अंत में क्या संकल्प किया?
7.  पड़ोसी राजा ने अंत में न्याय करने का संकल्प लिया

4.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-चार वाक्यों में दें:-

() ठग ने घोड़े को पहचान लिया परंतु घोड़े ने ठग को नहीं पहचाना इन पंक्तियों का क्या भाव है?
1.  ठग ने घोड़े को पहचान लिया परंतु घोड़े ने तंग को नहीं पहचाना इस पंक्ति का भाव है कि वह घोड़ा ठग का नहीं था क्योंकि अगर वह उसका होता तो वह उसे जरूर पहचान लेता
( ) राजा ने पड़ोसी राजा और ठग के मुकदमे का फैसला कैसे किया?
2.  अपने पड़ोसी राजा और ठग के मुकदमे का फैसला ऐसे किया कि उसने घोड़े को पहले ही अस्तबल में बांध दिया उसने पहले घुड़सवार राजा को बुलाया और उससे अस्तबल में ले जाकर कहा कि अपने घोड़े को पहचानो राजा ने तुरंत अपना घोड़ा पहचान लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरा  घोड़े ने भी अपने मालिक को पहचान लिया फिर राजा ने ठग को अमल में लाया और कह कर अपना घोड़ा पहचानो अग्नि घोड़ा तो पहचान लिया परंतु घोड़े ने ठग को नहीं पहचाना राजा ने अपना फैसला ठग के विरुद्ध सुनाया और उसे दंड दिया