Saturday, 23 May 2020

मित्रता

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मित्रता



1.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए_



(1) घर से बाहर निकल कर बाहरी संसार में विचरण ने पर युवाओं के सामने पहली कठिनाई क्या आती है?
1.  उत्तर:  घर से बाहर नहीं निकलकर बाहरी संसार में   विचरने पर युवाओं के सामने पहले कठिनाई मित्र चुनने की आती हैl




(2)  हमसे अधिक दृढ़ संकल्प वाले लोगों का बुरा हो सकता है
उत्तर:   ऐसे लोगों का साथ करना इसीलिए बुरा है क्योंकि हमें  उनकी हर बात बिना विरोध के मान लेनी पड़ती हैl

(3)  आजकल लोग दूसरों में कौन सी दो चार बातें देखकर चटपट उसे अपना मित्र बना लेते हैं?
उत्तर:  हंसमुख चेहरा, बातचीत का ढंग, थोड़ी  चतुराई या साहस- यही दो चार बातें किसी में देखकर लोग चटपट उसे अपना मित्र बना लेते हैंl

(4)  किस प्रकार के मित्र से भारी रक्षा रहती है
उत्तर:   विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती हैl

(5)  चिंताशील, निर्बल तथा धीर पुरुष किस प्रकार का साथ ढूंढते हैं?
उत्तर:  चिंतनशील मनुष्य प्रफुल्लित चित का साथ ढूंढता है, निर्बल बली का उत्साही काl

(6)   उच्च आकांक्षा वाला चित्रगुप्त युक्त उपाय के लिए किसका मुंह ताकता था?
उत्तर: उच्च आकांक्षा वाला चंद्रगुप्त युकित और उपाय के लिए चाणक्य का मुंह ताकता थाl

(7)  नीति विशारद अकबर मन बहलाने के लिए किसकी और देता था?
उत्तर:  नीति विशारद अकबर मन बहलाने के लिए बीरबल की तरफ देखता थाl

(8)  मकदूनिया के बादशाह डेमीटरयासके पिता को दरवाजे पर कौन सा ज्वर मिला था ?
उत्तर:  उसे दरवाजे पर कुसंग का ज्वर मिला थाl

(9)  राज दरबार में जगह ना मिलने पर इंग्लैंड का एक विद्वान अपने भाग्य को क्यों सरहाता था?
उत्तर:  वह अपने भाग्य को इसीलिए सराहता रहा क्योंकि वह अच्छी तरह जानता था कि वहां वह बुरे लोगों की संगति में पड़ता जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होतेl

(10)  हृदय उज्जवल और निशंकलंक रखने का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
उत्तर: हृदय को उज्जवल और निषलंक रखने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि बुरी संगति की छुत से बचा जाएl

2.   निम्नलिखितप्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए_

(1) विश्वासपात्र मित्र को खजाना, औषध और माता जैसा क्यों कहा गया?
उत्तर:   विश्वासपात्र मित्र को खजाना, औषध और मां जैसा इसीलिए कहा गया क्योंकि विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती हैl जिसे ऐसा मित्र मिल जाए उसे समझना चाहिए खजाना मिल गयाl विश्वासपात्र मित्र हमारे अंदर उत्तम संकल्पों को दृढ़ कर दोष और त्रुटियों से हमें बचाते हैंlहमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करते हैंl हमें कुमार्ग पर जाने से बचाते हैंl जब हम हतोत्साहित होते हैं तो उत्साहित होते हैंl उनमें वेध की निपुणता और परख होती हैl वे माता की तरह धैर्य और सहनशीलता के साथ हमें ठीक मार्ग पर चलाने के लिए प्रयत्नशील रहते हैंl

(2)    अपने से अधिक आत्मबल रखने वाले व्यक्ति को मित्र बनाने से क्या लाभ है?
उत्तर: हमें ऐसे मित्र की सहायता से अपनी सामर्थ्य से बाहर काम कर जाते हैंl जैसे सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ाl यदि मित्र प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हो तो हमारा अपना आत्मबल भी बढ़ जाता हैl

(3)   लेखक ने युवाओं के लिए कुसंगत और सत्संगत की तुलना किससे की और क्यों?
उत्तर:  किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बंदी चक्की के समान होगी जो उसे दिन-रात अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी यह उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगीl


3.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 6 या 7 पंक्तियों में दीजिए_

(1) सच्चे मित्र के कौन-कौन से गुण लेखक ने बताए हैं?
उत्तर:  सच्चा मित्र औषधि के समान हैl उत्तम संकल्पों से हमें दृढ़ करेंगे दोष और त्रुटियों से बचाएंगेl हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करता हैl आत्मा पूर्वक जीवन निर्वाह करने में हर तरह से सहायता देते हैंl सच्चे मित्र में उत्तम वेद की निपुणता और परख होती हैl उसमें अच्छी से अच्छी माता का सा धैर्य और कोमलता होती हैl

(2)  बाल्यावस्था और युवावस्था की मित्रता के अंतर को स्पष्ट कीजिए
उत्तर:  बाल्यावस्था की मित्रता में मगन करने वाला आनंद होता है, ह्रदय को बोधने वाले ईर्ष्या और खिनता होती हैl इस अवस्था में बहुत मधुरता और अपार विश्वास होता हैl वर्तमान बहुत आनंदमय दिखाई पड़ता हैl भविष्य के लिए लुभानेवाली कल्पनाएं मन में रहती हैंl युवावस्था की मित्रता स्कूल के बालक की मित्रता से दृढ़ शांत और गंभीर होती हैl

(3)   दो भिंनन प्रकृति के लोगों के परस्पर प्रीत और मित्रता बनी हो सकती है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए
उत्तर: दो भिन्न प्रकृति के मनुष्य में बराबर प्रीति और मित्रता रही है जैसे रामधीर और शांत प्रकृति के थे और लक्ष्मण उरग और उद्धत स्वभाव के थे पर दोनों भाइयों में प्रगाढ़ स्नेह थाl चिंताशील मनुष्य प्रफुल्लितमित्र का साथ ढूंढता है, निर्बल बली का,  धीर उत्साही काl उच्च आकांक्षा वाला चंद्रगुप्त युकित और उपाय के लिए चाणक्य का मुंह ताकता थाl नीति विशारद अकबर मन बहलाने के लिए बीरबल की और देखता थाl

(4)  आप करते समय हमें किन_ किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:  मित्र सच्चे पथ प्रदर्शक समान होना चाहिए,  जिस पर हम पूरा विश्वास कर सकेंl मित्र भाई के समान होना चाहिए जिसे हम अपना प्रीति पात्र बना सकेl मित्र के बीच सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए, ऐसी सहानुभूति जिससे एक के हानि लाभ को दूसरा अपना हानि लाभ समझेl प्रकृति और आचरण की समानता भी आवश्यक नहीं हैl दो भिन्न प्रकृति के मनुष्य में  बराबर प्रीति और मित्रता रह सकती हैl

(5)  बुराई अटल भाग धारण करके बैठती है? क्या आप लेकर की इस उकित से सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए
उत्तर:  हां, लेखक की इस युक्ति से मैं सहमत हूं कि बुराई अटल भाग धारण करके बैठती हैl बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैl इस बात को प्राय: सभी लोग जानते हैं कि भद्दे फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं, उतनी जल्दी कोई गंभीर जा अच्छी बात नहींl जिन्हें भावनाओं का हम दूर रखना चाहते जिन  बातों को हम याद करना नहीं चाहते वे बार-बार हृदय में उठती है और बंधती हैl एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है तब फिर यह नहीं देखता कि मैं कहां और  कैसी जगह पर पैर रखता हैl धीरे-धीरे बुरी बातों में अभ्यस्त होते-होते हमारी  सहनशीलता कम हो जाती हैl विवेक कुंठित हो जाता है और हमें भले बुरे की पहचान नहीं रहतीl अंत में होते होते हम भी बुराई के भक्त बन जाते हैंlअत:  हृदय को उज्जवल और निषलंक करने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि बुरी संगति की छुत से बचना चाहिएl