Saturday, 23 May 2020

मैं और मेरा देश

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मैं और मेरा देश



1.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए


(1)  लेखक को अपनी पूर्णता का बोध कब हुआ?
 उत्तर:  जब लेखक को यह समझ में आया कि उसे अपने लिए बहुतों की जरूरत पड़ती है और वह भी बहुतों की जरूरतें पूरी करता है तब उसे अपनी पूर्णता का बोध हुआl




(2)  मानसिक भूकमप से क्या अभिप्राय क्या है?
 उत्तर: मानसिक विचारों और विश्वासों में हलचल उत्पन्न होना ही मानसिक भूकंप कहलाता हैl

(3)  किस तेजस्वी पुरुष के अनुभव ने लेखक को हिला दिया?
उत्तर:  लाला लाजपत रायl

(4)  मनुष्य के लिए संसार के सारे उपहारों और साधनों को व्यर्थ क्यों कहा?
उत्तर: लेखक के अनुसार मानव को प्राप्त सभी उपहार है और साधन उस समय व्यर्थ होते हैं जब उसका देश गुलाम अथवा किसी अन्य रूप में हीन होl

(5) ' युद्ध में जय' बोलने वालों का क्या महत्व है?
उत्तर:  युद्ध में 'जय' बोलने वालों का महत्व यह है कि 'जय' बोलने से लड़ने वालों योद्धाओं में जोश पैदा होता है और उनका आत्मबल बढ़ता हैl

(6)  दर्शकों की तालियां खिलाड़ियों पर क्या प्रभाव डालती है?
उत्तर: दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों के पैरों में बिजली लग जाती है और गिरते खिलाड़ी उबर जाते हैंl

(7)  जापान के स्टेशन पर स्वामी रामतीर्थ क्या ढूंढ रहे थे?
7.  उत्तर:  जापान के स्टेशन पर स्वामी रामतीर्थ पर ढूंढ रहे थेl

(8)  कमालपाशा कौन थे?
8.  उत्तर:  कमालपाशा तुर्की के राष्ट्रपति थेl

(9)  बूढ़े किसान ने कमालपाशा को क्या उपहार दिया?
उत्तर:  बूढ़े किसान ने कमालपाशा को उनकी वर्षगांठ के अवसर पर मिट्टी की छोटी सी हांडी में पाव भर शहद उपहार में दियाl

(10)  किसान ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को क्या उपहार दिया?
उत्तर:किसान ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को रंगीन सुतलियो से बनी एक खाट भेंट कीl

(11)  लेखक के अनुसार हमारे देश को किन दो बातों की आवश्यकता है?
1उत्तर:  देश को किन दो बातों की आवश्यकता है, वे है शक्ति- बोध और सौंदर्य-बोधl

(12)  शल्य कौन था?
1उत्तर: शल्य  महाबली कर्ण का सारथी थाl

2.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए_

(1) लाला लाजपत राय के किस अनुभव ने लेखक की पूर्णता को अपूर्णता में बदल दिय?
1.        उत्तर: लाला लाजपत राय जब विभिन्न देशों में घूमकर अपने देश में लौटे तो उन्होंने अपना सारा अनुभव एक ही वाक्य में बिखेर दियाl उनका अनुभव था "मैं अमेरिका गय, इंग्लैंड गया, फ्रांस गया और संसार के दूसरे देशों में भी घुमा पर जहां भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहाl इसी वाक्य में लेखक की पूर्णता को अपूर्णता में बदल दियाl

(2) स्वामी रामतीर्थ द्वारा फलों की टोकरी का मूल्य पूछने पर जपानी युवक ने क्या कहा?
 उत्तर: स्वामी रामतीर्थ फलों की टोकरी का मूल्य पूछने पर जपानी युवक ने कहा आप इनका मूल्य ही देना चाहते हैं तो यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलतेll

(3) किसी देश के विद्यार्थी ने जापान में ऐसा कौन सा काम किया जिससे उसके देश के माथे पर कलंक का टीका लग गया?
उत्तर:  एक अन्य देश के विद्यार्थी ने  पुस्तकालय की एक पुस्तक से एक अनूपलब्ध चित्र निकाल लियाl पकड़े जाने पर उसे ना केवल जापान से ही निकाल दिया गया बल्कि उस देश के नागरिकों का उस पुस्तकालय में प्रवेश करना भी बंद कर दिया गयाl इससे उसके देश के माथे पर कलंक का टीका लग गयाl

(4)  लेखक के अनुसार कोई भी कार्य महान कैसे बन जाता है?
उत्तर:  लेखक के अनुसार कार्य को महान बनाना हो तो उसके करने की भावना अच्छी होनी चाहिएl महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं बल्कि उससे कार्य के करने की भावना में हैl बड़े से बड़ा कार्य हीन है यदि उसके पीछे अच्छी भावना नहीं है और छोटे से छोटा कार्य भी महान है जिसके पीछे अच्छी भावना हैl

(5)  शल्य ने कौन सा महत्वपूर्ण कार्य किया? पाठ के आधार पर लिखिए
उत्तर:  शल्य ने अजेयता की बार बार चर्चा करके कर्ण के आत्मविश्वास में ऐसी कमी उत्पन्न की जो उसकी भावी पराजय की नीव बन गईl

(6)   शक्ति बोध और सौंदर्य बोध से क्या तात्पर्य है? पाठ के आधार पर बताइए
उत्तर: शक्ति बोध का अर्थ है शक्ति का ज्ञानl लेखक इस आशय को स्पष्ट करता हुआ कहता है कि जब हम आपस में यह चर्चा करते हैं कि हमारे देश में यह कमियां है अपने देश की तुलना दूसरे देशों से करते हैं और अपने देश को हीन और दूसरे देशों को श्रेष्ठ सिद्ध करते हैं तो हम अपने देश को भयंकर चोट पहुंचा रहे हैंl और अपने आत्मविश्वास को चोट पहुंचा रहे हैंl और वही सौंदर्य से अभिप्राय है 'सुंदरता' और बोध का अर्थ है 'ज्ञान'l हम दूसरों के सौंदर्य की बात करते हैं अपने देश को सव्यं गंदा रखते हैं समय के पाबंद नहीं है और दूसरों की इन बातों पर तारीफ करते हैंl हमें अपनी शक्तियों को पहचानना होगा और देश को सुंदरता में सव्यं ही सहयोग देना होगाl

(7)  अपने देश के शक्ति बोध को किस प्रकार चोट पहुंचाते हैं?
उत्तर:  लेखक के अनुसार जब हम अपने देश भारत की चर्चा करते हुए उसकी तुलना दूसरे देशों के साथ करते हैं और भारत को उनकी अपेक्षा तुष्य शक्तिहीन  आदि सिद्ध करते हैं तब हम देश के शक्ति बोध को ठेस पहुंचाते हैंl

(8)  हम अपने देश के सौंदर्य बोध को किस प्रकार चोट पहुंचाते हैं?
उत्तर:  रास्तों पर गंदगी फैलाकर, घरों से बाहर कूड़ा फेंककर, गंदे शब्दों से गंदे भाव बोलकर, जगह- जगह पर थूककर, निमंत्रित होने पर लेट पहुंचकर और वचन देकर सही समय पर ना मिलने पर हम अपने देश के सौंदर्य बोध को चोट पहुंचाते हैंl

(9)  देश की ऊंचचताथा और हीनता की कसौटी क्या है?
उत्तर:  देश की उच्चता या हीनता की कसौटी चुनाव हैl जहां के नागरिक अपने मत का उचित प्रयोग करते हैं, वह देश उच्च हैl जहां मतदान का गलत प्रयोग होता है, वह देश हीन हैl

3.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 6 या 7 पंक्तियों में दीजिए_

(1)  लाला लाजपत राय जी ने देश के लिए कौन सा महत्वपूर्ण कार्य किया? निबंध के आधार पर उत्तर दीजिए
उत्तर: लाला लाजपत राय ने भारतवर्ष की दास्तां के दिनों में बड़ा ही महत्वपूर्ण कार्य कियाl उन्होंने अपने देश के उत्थान में अपने देश को स्वतंत्र करवाने में लोगों में राष्ट्रीय भावना को उत्पन्न करने के लिए अपने भाषणों तथा अपने लेखों द्वारा अद्भुत उत्साह उत्पन्न कर दियाl इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों की यात्रा में उन्हें भारतवर्ष की पराधीनता के कलंक का लज्जाजनक अनुभव हुआ और उन्होंने भारत वासियों को इस कलंक से मुक्त होने के लिए प्रेरित कियाl

(2)  तुर्की के राष्ट्रपति कमाल पाशा और भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित घटनाओं द्वारा लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर:  लेखक इन दोनों घटनाओं से यह संदेश देना चाहता है कि महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है बल्कि उस कार्य के करने की भावना में हैl बड़े से बड़ा कार्य छोटा हो जाता है यदि उसे करने के पीछे अच्छी भावना नहीं है और छोटे से छोटा कार्य भी महान हो जाता है यदि उसके पीछे अच्छी भावना हैl

(3)  लेखक
उत्तर:  लेखक नागरिकों को समझाते हैं कि चुनाव में किसी ऐसे व्यक्ति को अपना मत नहीं देना चाहिए जो उत्तेजक नारे लगवाएlयह हर नागरिक का कर्तव्य है कि जब भी कोई चुनाव हो, वे ठीक मनुष्य को अपना मत दें ताकि कुछ गलत व्यक्ति किसी अधिकार की कुर्सी पर ना बैठ सकेl