Sunday, 31 May 2020

Jayaprakash Bharti

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Jayaprakash Bharti





जयप्रकाश भारती के जीवन-परिचय

पत्रकार एवं हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक श्री जयप्रकाश भारती ने साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक लेख लिखने और साक्षरता प्रसार के कार्य में विशेष ख्याति प्राप्त की है। ये सफल निबन्धकार, कहानीकार एवं रिपोर्ताज लेखक हैं। गम्भीर विषय को भी रुचिकर और बोधगम्य बनाकर प्रस्तुत करने में आप सिद्धहस्त हैं।


जीवन-परिचयश्री जयप्रकाश भारती का जन्म मेरठ नगर के मध्यमवर्गीय प्रतिष्ठित परिवार में 2 जनवरी, सन् 1936 ई० को हुआ था। इनके पिता श्री रघुनाथ सहाय मेरठ के प्रसिद्ध वकील, पुराने कांग्रेसी और समाज-सेवी व्यक्ति थे। इन्होंने  मेरठ में अध्ययन कर बी० एस-सी० की परीक्षा उत्तीर्ण की और छात्र-जीवन से ही समाज-सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में समाज-सेवा की। मेरठ में साक्षरता-प्रसार के लिए इन्होंने कई वर्षों तक प्रौढ़ रात्रि-पाठशाला का नि:शुल्क संचालन कर उल्लेखनीय कार्य किया। इन्होंने सम्पादन कला-विशारदकी परीक्षा उत्तीर्ण करके मेरठ से प्रकाशित होने वाले दैनिक प्रभातऔर दिल्ली से प्रकाशित होने वालेनवभारत टाइम्समें व्यावहारिक प्रशिक्षण तथासाक्षरता-निकेतनलखनऊ में नवसाक्षर साहित्य के लेखन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने कई वर्षों तक दिल्ली से प्रकाशित होने वालेसाप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक के रूप में कार्य किया। तत्पश्चात् दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा संचालित सुप्रसिद्ध बाल पत्रिकानंदनके सम्पादक के रूप में कार्य करते रहे। दिनांक 5 फरवरी, 2005 को श्री भारती जी का देहावसान हो गया।






रचनाएँ-भारती जी की अनेक मौलिक एवं लगभग सौ सम्पादित पुस्तकें हैं। इनकी उल्लेखनीय रचनाएँ अग्रलिखित हैं
1.        मौलिक रचनाएँ-‘हिमालय की पुकार’, ‘अनन्त आकाश : अथाह सागर’ (ये दोनों पुस्तकें यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत हैं); ‘विज्ञान की विभूतियाँ’, ‘देश हमारा’, ‘चलो चाँद पर चलें’ (ये तीनों पुस्तकें भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत हैं), ‘सरदार भगत सिंह’, ‘हमारे गौरव के प्रतीक’, ‘अस्त्र-शस्त्र’, ‘आदिम युग से अणु युग तक’, ‘उनका बचपन यूँ बीता’, ‘ऐसे थे हमारे बापू’ , “लोकमान्य तिलक’, ‘बर्फ की गुड़िया’, ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’, ‘भारत को संविधान’, ‘दुनिया रंग-बिरंगीआदि।
2.        सम्पादित रचनाएँ-‘भारत की प्रतिनिधि लोककथाएँ तथा किरणमाला’ (तीन भागों में) आदि।
3.        सम्पादन-कार्य–‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक एवंनंदन’ (बाल-पत्रिका) के सम्पादक।

साहित्य में स्थान-बालोपयोगी साहित्य के प्रणयन, वैज्ञानिक लेखों के साहित्यिक शैली में प्रस्तुतीकरण एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में जयप्रकाश भारती का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने साहित्य में वैज्ञानिक लेखन के अभाव की पूर्ति कर हिन्दी-साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान  बना लिया है।